सुख दुःख से कैसे उभरा जाए

by Gurwinder

श्रद्धालु संत जी से पूछ रहे थे कि सुख दुःख से कैसे उभरा जाए|
संत जी ने श्रद्धालु से बोला कि कब्रों की जगह में जाओ, वहां हर प्रकार की प्रशंसा तथा गुणगान कर वापिस आओ| उसने ऐसे ही किया, वापिस आने पर संत जी ने पूछा कि किसी ने कोई जवाब दिया? कोई जवाब ना मिला|
फिर से वापिस जाओ और सब को ज़ोर-ज़ोर से गाली निकाल कर आओ| वापिस आने पर संत जी ने पूछा कि किसी ने कोई जवाब दिया? श्रद्धालु ने कहा नहीं|
संत जी ने कहा के, “तुम्हारे प्रश्न का उतर यही है, कोई हमारी प्रशंसा करें, कोई हमें गाली निकले, सुखी तथा दुखी नहीं होना|”
पुस्तक- खिड़कियाँ
नरिंदर सिंह कपूर

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