गुनाह

by Gurwinder

मुझे याद है कि एक बार बचपन में सारी रात कुरान पड़ रहा था और कई लोग मेरे पास आराम से सो रहे थे| मैंने अपने पूजनीय पिता जी को बोला, “इन सब सोने वालों की ओर देखो, नमाज़ पड़ना तो दूर की बात कोई सिर भी नहीं उठा रहा| पिता जी ने उतर दिया, बेटा, तुम भी बस सो जाते तो अच्छा था क्योंकि इस गुनाह से तो बच जाता|

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