घोसला

by Gurwinder

बारिश में एक घटना हुई…! एक वृक्ष के ऊपर से एक घोसला जोरदार हवा झोंके से नीचे गिर
गया…! घोसले को नीचे जमीन पर गिरा देख कर चिड़ा और चिड़ी चुपचाप बैठे रहे….!
चिड़ा: “सुबह देखते हैं”
चिड़ी: “ठीक है”
दोनों वृक्ष की एक शाखा के किनारे बैठकर सुबह होने का इंतजार करते रहे…..! सुबह का
साफ मौसम देखकर दोनों खुश हो गए…! चिड़ा जोर से बोला….! क्या अब हम चलें? शुरू
से…? नयें तिनके इक्कठे करें…?
चिड़ी कुछ ना बोली…. बस चुपचाप चिड़े की आंखों में देखती रही…..! उसकी आंखों में पानी
देखकर चिड़ा बोला, “पागल, रो क्यों रही हो? गिराना किस्मत की हाथ में है…..’और बनाना
हमारे हाथ में है….!” और किसकी मदद का रास्ता देखे….? हम इंसान तो नहीं हैं….!
दोनों चल पड़े…, एक नई शुरुआत करने|
इसे ही जिंदगी कहते हैं…|

You may also like