लड़की

आज तेज कौर ने अपनी छोटी बहु को शहर डॉक्टर के पास लेकर जाना था इस लिए उसने सुबह-सुबह ही रसोई का कार्य निपटा लिया था | वह दोनों तैयार होकर शहर जाने की लिए गांव से बाहर बने बस स्टॉप पर पहुंच कर बस की राह देखने लगी | उनके देखते ही बस भी वहां पर आ गई | बड़ा व्: भारी शरीर होने के कारण तेज कौर अपनी बहु का सहारा लेकर मुश्किल से बस में चड़ पाई और यहाँ वहां बैठने के लिए देखने लगी किन्तु स्कूल-कालेज का समय होने के कारण बस बच्चों से भरी पड़ी थी | तेज कौर ने दो लड़कों को उसके बुढ़ापे के कारण बैठने के लिए सीट छोड़ने के लिए कहा , पर लड़के अपने फोन में व्यस्त थे और सीट छोड़ने के लिए तयार नहीं थे |

यह सब द्रश्य पीछे की सीट पर बेठी एक नौजवान लड़की देख रही थी जिसने अपने हाथों में एक बच्चे को पकड़ रखा था , वह अपनी सीट से खड़ी हुई और बोली , “ माँ जी यहाँ पर बैठ जाओ ” लड़की को सीट से खड़ा होते देखकर तेज कौर भावुक हो गई और बोली , “ सदा खुश रहो बेटी मुझे अब शहर जाने की कोई जरूरत नहीं है , में तो लड़के के लालच में अपनी बहु के पेट में पल रही लड़की को गिरवाने डॉक्टर के पास जा रही थी , परन्तु तुमने मेरे आंखे खोल दी ” यह कहती तेज कौर अपनी बहु को लेकर बस में से उतर गई , कन्डक्टर ने सिटी बजाई और पलों में ही मिटटी उड़ाती बस उनकी आंखों से ओझल हो गई |

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